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क्रिकेट नियम: 7 बदलाव 2026 में
विशेष ब्रीफिंग

क्रिकेट नियम: 7 बदलाव 2026 में

क्रिकेट के नियम शुरुआती लोगों के लिए समझना मुश्किल नहीं है। क्रिकेट में दो टीमें मैदान पर खेलती हैं, एक टीम बल्लेबाजी करके रन बनाती है और दूसरी गेंदबाजी तथा क्षेत्ररक्षण से उसे रोकती है। टेस्ट क्रिकेट...

29 अक्टूबर 2026 5 min read
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क्रिकेट नियम: 7 बदलाव 2026 में

क्रिकेट के नियम शुरुआती लोगों के लिए समझना मुश्किल नहीं है। क्रिकेट में दो टीमें मैदान पर खेलती हैं, एक टीम बल्लेबाजी करके रन बनाती है और दूसरी गेंदबाजी तथा क्षेत्ररक्षण से उसे रोकती है। टेस्ट क्रिकेट पांच दिन, एकदिवसीय क्रिकेट 50 ओवर और टी20 क्रिकेट 20 ओवर प्रति पारी का होता है। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के नियमों के अनुसार विकेट, क्रीज, कैच और अपील खेल के निर्णायक हिस्से हैं। 2026 में भी मूल ढांचा यही है, लेकिन पावरप्ले, डीआरएस और समय-प्रबंधन जैसे नियमों को समझना जरूरी है। पहले बल्लेबाज, गेंदबाज और अंपायर की भूमिकाएं समझें, फिर स्कोरकार्ड पढ़ने का अभ्यास करें।

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रोशनी से जगमगाते क्रिकेट मैदान में शुरुआती खिलाड़ी बल्लेबाजी और गेंदबाजी की मूल स्थिति सीखते हुए

क्रिकेट के बुनियादी नियम जानने के बाद खेल देखना कहीं आसान हो जाता है। खेल का मैदान पर मैच समीक्षा, खिलाड़ी आंकड़े, आईपीएल कवरेज तथा बल्लेबाजी और गेंदबाजी रणनीति पढ़ते समय यही आधार बार-बार काम आता है। जिम्मेदार खेल-सम्बंधी जानकारी के लिए आधिकारिक नियमों और विश्वसनीय स्कोरकार्ड को प्राथमिकता दें; किसी भी सट्टेबाजी निर्णय को खेल की समझ का विकल्प न बनाएं।

और नियमों को एक जगह व्यवस्थित रूप से देखने के लिए यहां से शुरुआत करें।

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क्या क्रिकेट के नियम सचमुच आसान हैं?

हां, क्रिकेट के नियम आसान हैं, यदि उन्हें चार हिस्सों में समझा जाए: रन बनाना, विकेट लेना, ओवर पूरा करना और परिणाम तय करना। एक ओवर में सामान्यतः छह वैध गेंदें होती हैं, जबकि नो-बॉल और वाइड उस गिनती में नहीं जुड़ते। बल्लेबाज क्रीज के भीतर सुरक्षित रहता है और क्षेत्ररक्षण टीम विकेट गिराने का प्रयास करती है।

“क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसमें नियमों की स्पष्टता रणनीति को जन्म देती है।” यह विचार शुरुआती दर्शक के लिए उपयोगी है, क्योंकि हर गेंद पर केवल रन या विकेट नहीं होता; गेंद की वैधता, बल्लेबाज का स्थान और क्षेत्ररक्षकों की स्थिति भी मायने रखती है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद, यानी आईसीसी, पुरुष और महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के प्रमुख प्रारूपों के लिए खेल-शर्तें प्रकाशित करती है। आईसीसी के आधिकारिक नियम और खेल-शर्तें देखने पर यह स्पष्ट होता है कि टेस्ट में दो पारियां प्रति टीम हो सकती हैं, जबकि एकदिवसीय और टी20 में सामान्यतः एक-एक पारी होती है। भारत में भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड, इंग्लैंड में इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड तथा ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया घरेलू आयोजन संभालते हैं। शुरुआती गलती यह होती है कि दर्शक हर गेंद को छह गेंदों में गिन लेता है; वाइड और नो-बॉल को छोड़कर ही ओवर पूरा होता है। क्रिकेट स्कोरकार्ड पढ़ने की शुरुआती मार्गदर्शिका भी इस भ्रम को जल्दी दूर कर सकती है।

मैच शुरू होने से पहले क्या तय होता है?

टॉस के बाद कप्तान बल्लेबाजी या गेंदबाजी चुनता है, और यह निर्णय पिच, मौसम, ओस तथा प्रारूप पर निर्भर करता है। मैदान में दो बल्लेबाज, एक गेंदबाज, एक विकेटकीपर और अधिकतम नौ अन्य क्षेत्ररक्षक सक्रिय रहते हैं। गेंदबाज का छोर बदलता है, लेकिन बल्लेबाज रन लेने के लिए पिच के दोनों सिरों के बीच दौड़ते हैं।

क्रिकेट पिच की लंबाई 22 गज, यानी लगभग 20.12 मीटर, होती है। दोनों सिरों पर तीन-तीन स्टंप और दो-दो बेल वाला विकेट लगा रहता है। बल्लेबाज का पॉपिंग क्रीज से आगे पहुंचना सुरक्षित माना जाता है; यदि गेंद विकेट पर लग जाए या क्षेत्ररक्षक गेंद के साथ बेल गिरा दे और बल्लेबाज क्रीज से बाहर हो, तो रन-आउट हो सकता है। गेंदबाज को छह वैध गेंदों के बाद ओवर बदलना पड़ता है, और अगला ओवर दूसरे छोर से आता है। टेस्ट क्रिकेट में आम तौर पर लाल गेंद, एकदिवसीय और टी20 में सफेद गेंद इस्तेमाल होती है, हालांकि प्रतियोगिता के नियम अलग हो सकते हैं। सफेद गेंद की दृश्यता और स्विंग का व्यवहार लाल गेंद से अलग होता है, इसलिए केवल रंग देखकर प्रारूप का पूरा अनुमान लगाना थोड़ा जल्दबाजी है, मित्र। विकिपीडिया का क्रिकेट नियम संदर्भ मूल शब्दावली और खेल की संरचना समझने में सहायक है।

नो-बॉल और वाइड जैसे मामलों को खेल कैसे संभालता है?

नो-बॉल और वाइड दोनों अतिरिक्त रन देते हैं, लेकिन उनका कारण अलग होता है। नो-बॉल में गेंदबाज ने डिलीवरी की वैध शर्त तोड़ी होती है, जबकि वाइड गेंद बल्लेबाज की सामान्य पहुंच से बाहर जाती है। दोनों ही मामलों में गेंद बल्लेबाज के ओवर की छह वैध गेंदों में नहीं गिनी जाती।

नो-बॉल पर बल्लेबाजी टीम को कम से कम एक अतिरिक्त रन मिलता है और बल्लेबाज उस गेंद पर रन भी बना सकता है। सीमित ओवर क्रिकेट में नो-बॉल के बाद अक्सर फ्री हिट मिलती है, जिसका अर्थ है कि अगली वैध डिलीवरी पर सामान्यतः बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू या स्टंपिंग से आउट नहीं दिया जाता; रन-आउट और कुछ अन्य तरीके फिर भी संभव रहते हैं। वाइड पर एक अतिरिक्त रन मिलता है, और गेंद तब तक दोहराई जाती है जब तक वह वैध न हो। यदि वाइड गेंद सीमा रेखा तक चली जाए, तो कुल पांच वाइड रन मिल सकते हैं। यह वही जगह है जहां नए दर्शक स्कोरकार्ड देखकर माथा पकड़ लेते हैं, क्योंकि अतिरिक्त रन बल्लेबाज के निजी स्कोर में नहीं जुड़ते, मगर टीम के कुल योग में जरूर जुड़ते हैं। नो-बॉल, वाइड और बाई का अंतर पढ़ने से एक्स्ट्रा के चार प्रकार—वाइड, नो-बॉल, बाई और लेग-बाई—साफ हो जाते हैं।

विकेट गिरने के मुख्य तरीके कौन-से हैं?

बल्लेबाज बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू, रन-आउट, स्टंप्ड, हिट विकेट, हिट द बॉल ट्वाइस, ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड और टाइम्ड आउट जैसे तरीकों से आउट हो सकता है। व्यवहार में शुरुआती दर्शक सबसे अधिक बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू, रन-आउट और स्टंप्ड देखता है।

बोल्ड में गेंद स्टंप से टकराकर बेल गिराती है। कैच में बल्ले से लगी गेंद जमीन छूने से पहले क्षेत्ररक्षक पकड़ता है; कैच पूरा होने तक नियंत्रण और गेंद का जमीन से संपर्क दोनों देखे जाते हैं। एलबीडब्ल्यू में अंपायर जांचता है कि गेंद विकेट की दिशा में थी, बल्लेबाज के शरीर से टकराने से पहले बल्ले से नहीं लगी और अनुमानित रूप से स्टंप पर लगती। रन-आउट में बल्लेबाज क्रीज से बाहर हो और विकेट गेंद के नियंत्रण में गिरा दिया जाए। स्टंपिंग तब होती है जब विकेटकीपर गेंद पकड़कर क्रीज से बाहर निकले बल्लेबाज का विकेट गिराता है, बशर्ते वह रन लेने की कोशिश न कर रहा हो। हिट विकेट में बल्लेबाज अपने बल्ले या शरीर से विकेट गिरा देता है। 2023 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ‘मांकडिंग’ शब्द की जगह रन-आउट की श्रेणी का इस्तेमाल अधिक आधिकारिक रूप से किया गया, इसलिए पुराने वीडियो देखकर भ्रमित न हों।

अब आउट होने के तरीकों का एक संक्षिप्त सार देखना उपयोगी रहेगा।

  1. गेंद से विकेट: बोल्ड और एलबीडब्ल्यू।
  2. हवा में गेंद: कैच।
  3. क्रीज से बाहर: रन-आउट और स्टंप्ड।
  4. बल्लेबाज की गलती: हिट विकेट।
  5. विशेष स्थितियां: टाइम्ड आउट और क्षेत्र में बाधा डालना।

यह वर्गीकरण नियम रटने से बेहतर है, क्योंकि हर निर्णय के पीछे गेंद, विकेट और बल्लेबाज की स्थिति का संबंध समझ में आता है।

इस हिस्से की तकनीकी बारीकियों को उदाहरणों के साथ पढ़ने के लिए यहां देखें।

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विकेटकीपर सफेद गेंद पकड़कर स्टंप्स के पीछे खड़ा है, सामने बल्लेबाज क्रीज में लौट रहा है

अगर मामला असामान्य हो तो क्या होता है?

असामान्य स्थिति में अंपायर खेल-शर्तों, उपलब्ध तकनीक और गेंद की घटना के क्रम के आधार पर निर्णय देता है। बारिश, खराब रोशनी, चोट, गेंद खोना, सुपर ओवर और डीआरएस जैसी परिस्थितियों में सामान्य नियमों के साथ अतिरिक्त प्रावधान लागू होते हैं।

डीआरएस, यानी निर्णय समीक्षा प्रणाली, खिलाड़ी को हर अंपायर निर्णय चुनौती देने का सीमित अवसर देती है। टीम समीक्षा मांगती है, तीसरा अंपायर रीप्ले, हॉक-आई, अल्ट्राएज और अन्य उपलब्ध तकनीक देखता है, फिर मैदानी अंपायर का निर्णय कायम रख सकता है या बदल सकता है। टेस्ट और सीमित ओवर प्रारूप में समीक्षाओं की संख्या प्रतियोगिता की खेल-शर्तों पर निर्भर हो सकती है; इसलिए किसी पुराने मैच की संख्या को हर 2026 मुकाबले पर लागू करना ठीक नहीं। यदि तकनीकी प्रमाण निर्णायक न हो, तो कई फैसलों में मैदानी अंपायर का मूल निर्णय बना रहता है। डीआरएस का सबसे उपयोगी पाठ यह है कि समीक्षा बहस जीतने का बटन नहीं, बल्कि सीमित संसाधन है। कप्तान को बल्लेबाज, गेंद की दिशा और उपलब्ध समीक्षा संकेतों को देखकर फैसला करना पड़ता है। आईसीसी की 2026 प्रतियोगिता पुस्तिका में लागू नियमों की पुष्टि करना बेहतर है, क्योंकि टूर्नामेंट विशेष शर्तें बदल सकता है।

बारिश वाले मैच में डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धति लक्ष्य संशोधित कर सकती है। यह पद्धति बचे हुए ओवर और उपलब्ध विकेट को ध्यान में रखती है, इसलिए लक्ष्य केवल पहले स्कोर से साधारण अनुपात में कम नहीं किया जाता। न्यूनतम ओवर की शर्त पूरी न होने पर सीमित ओवर मैच का परिणाम रद्द भी हो सकता है। टेस्ट में बारिश के कारण समय नष्ट होना अलग तरह से परिणाम प्रभावित करता है, क्योंकि वहां ओवरों से अधिक पांच दिन की समय-सीमा महत्वपूर्ण है। टाई और बराबरी भी अलग बातें हैं: टाई में दोनों टीमों के रन समान और दोनों पारियां पूरी होती हैं, जबकि टेस्ट ड्रॉ में समय समाप्त होने तक विजेता तय नहीं होता। सुपर ओवर में दोनों टीमें एक-एक ओवर खेलती हैं और सीमित गेंदों में अधिक रन बनाने वाली टीम जीतती है। यह नियम खासकर आईपीएल, बिग बैश लीग और आईसीसी टी20 मुकाबलों में दर्शकों के लिए उपयोगी है। डीआरएस और वर्षा-प्रभावित मैचों की पूरी व्याख्या कठिन स्कोरकार्ड को पढ़ने में मदद करेगी।

क्षेत्ररक्षण के प्रतिबंध क्यों होते हैं?

क्षेत्ररक्षण प्रतिबंध बल्लेबाज और गेंदबाज के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए होते हैं। टी20 और एकदिवसीय क्रिकेट में पावरप्ले के दौरान 30-यार्ड घेरे के बाहर सीमित संख्या में क्षेत्ररक्षक रखे जा सकते हैं, जबकि बाकी समय नियम कुछ ढीले होते हैं।

टी20 में सामान्यतः पहले छह ओवर पावरप्ले माने जाते हैं और अधिकतम दो क्षेत्ररक्षक 30-यार्ड घेरे के बाहर रह सकते हैं। एकदिवसीय क्रिकेट में पहले 10 ओवरों के दौरान भी अधिकतम दो क्षेत्ररक्षक घेरे के बाहर रखने का प्रावधान रहता है; बाद के चरणों में संख्या बढ़ सकती है, लेकिन प्रतियोगिता के 2026 नियमों की पुष्टि जरूरी है। क्षेत्ररक्षण प्रतिबंध का उल्लंघन होने पर अंपायर नो-बॉल दे सकता है। गेंदबाज के लिए भी सीमाएं हैं: एक ओवर में लगातार दो बाउंसर की अनुमति कई सीमित ओवर प्रारूपों में लागू हो सकती है, जबकि कमर से ऊपर की फुल टॉस खतरनाक मानी जा सकती है। इन सीमाओं का उद्देश्य केवल रन बढ़ाना नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की सुरक्षा और दर्शनीय मुकाबला बनाए रखना है। इसलिए पावरप्ले में आक्रामक बल्लेबाजी दिखती है, मगर कप्तान के पास तीस गज के भीतर चुस्त क्षेत्ररक्षक लगाने की रणनीतिक गुंजाइश भी रहती है।

टी20 पावरप्ले के दौरान 30-यार्ड घेरे के भीतर फैले क्षेत्ररक्षक और आक्रामक सलामी बल्लेबाज

क्रिकेट के नियम कहां असफल लगते हैं?

क्रिकेट के नियम स्वयं असफल नहीं होते, लेकिन अलग प्रारूपों और बदलती खेल-शर्तों के कारण दर्शक को निर्णय असंगत लग सकता है। एकदिवसीय नो-बॉल, टेस्ट की फील्डिंग सीमा, टी20 सुपर ओवर और डीआरएस की समीक्षा संख्या अलग हो सकती है, इसलिए हर मैच के लिए प्रतियोगिता नियम देखना जरूरी है।

सबसे आम भ्रम स्कोर और गेंदों की गिनती को लेकर होता है। “5.3 ओवर” का अर्थ पांच ओवर और तीन वैध गेंदें है, न कि पांच दशमलव तीन ओवर; छह गेंदों के आधार पर यह 33 गेंदें होती हैं। इसी तरह 10 अतिरिक्त रन बल्लेबाज के 10 रन नहीं होते, लेकिन टीम के स्कोर में जुड़ते हैं। दूसरा भ्रम रन-रेट का है: रन-रेट = बनाए गए रन ÷ खेले गए ओवर, परंतु डकवर्थ-लुईस-स्टर्न लक्ष्य में संसाधन प्रतिशत और संशोधित ओवर का गणित अलग होता है। तीसरा भ्रम एलबीडब्ल्यू का है; गेंद का पैड पर लगना अपने आप आउट नहीं बनाता। पिचिंग, इम्पैक्ट, विकेट की दिशा और बल्ले से पहले पैड की स्थिति सभी देखी जाती हैं। एमसीसी के आधिकारिक नियम-पृष्ठ में नियमों की पूरी भाषा उपलब्ध है, जबकि प्रसारण ग्राफिक्स अक्सर केवल अंतिम निर्णय दिखाते हैं। इसलिए धीमी रीप्ले को नियम का पूरा विकल्प न मानें।

शुरुआती दर्शक के लिए यह जांच-सूची काफी काम की है:

  • क्या गेंद वैध थी या वाइड/नो-बॉल?
  • बल्लेबाज ने रन पूरा किया या क्रीज में पहुंचा?
  • गेंद जमीन पर लगी थी या कैच साफ था?
  • विकेट गिरने से पहले बेल वास्तव में हटी?
  • क्या उस प्रारूप में डीआरएस या फ्री हिट लागू थी?
  • स्कोरबोर्ड पर रन बल्लेबाज के हैं या एक्स्ट्रा के?

यहां एक कम चर्चित लेकिन उपयोगी तथ्य भी है: ओवर की गिनती केवल वैध गेंदों से होती है, इसलिए छह गेंदों का ओवर कभी-कभी सात या आठ वास्तविक डिलीवरी में पूरा हो सकता है। दूसरी ओर, बाई और लेग-बाई टीम के रन होते हैं, बल्लेबाज के निजी रन नहीं। इन दोनों बातों को समझ लेने पर अधिकांश शुरुआती स्कोरिंग भ्रम खत्म हो जाते हैं। क्रिकेट स्कोर, रन-रेट और एक्स्ट्रा समझने का मार्गदर्शक को साथ रखकर लाइव मैच देखना ज्यादा समझदारी है, बजाय हर तीसरे ओवर में अनुमान लगाने के।

इस व्यावहारिक जांच-सूची को सहेजकर मैच के दौरान इस्तेमाल करें।

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क्या आपको आज क्रिकेट नियम सीखना चाहिए?

हां, आज क्रिकेट नियम सीखना चाहिए, क्योंकि केवल 15 मिनट में रन, विकेट, ओवर, एक्स्ट्रा और परिणाम की बुनियादी भाषा समझी जा सकती है। शुरुआत टी20 मैच से करें, फिर एकदिवसीय और टेस्ट प्रारूप की अतिरिक्त शर्तों पर जाएं। आधिकारिक आईसीसी नियमों के साथ लाइव स्कोरकार्ड देखने से सीखना सबसे तेज होता है।

एक आसान सीखने की योजना बनाइए। पहले दिन पिच, क्रीज, विकेट और ओवर समझें; दूसरे दिन आउट होने के पांच मुख्य तरीके देखें; तीसरे दिन वाइड, नो-बॉल, बाई और लेग-बाई पहचानें। चौथे दिन पावरप्ले, डीआरएस और रन-रेट पर ध्यान दें। पांचवें दिन किसी आईपीएल 2026 या आईसीसी मैच का स्कोरकार्ड बिना कमेंट्री पढ़ने का प्रयास करें। खेल का मैदान जैसे क्रिकेट-केंद्रित मंच पर मैच समीक्षा पढ़ते समय खिलाड़ी के आंकड़ों को नियमों से जोड़ें—उदाहरण के लिए स्ट्राइक रेट बल्लेबाजी की गति बताता है, जबकि इकॉनमी गेंदबाज के प्रति ओवर औसत रन दिखाती है। ये आंकड़े नियम नहीं हैं, मगर नियमों के परिणाम को समझने में मदद करते हैं। सट्टेबाजी या भुगतान वाले पूर्वानुमान से पहले उम्र, स्थानीय कानून और जिम्मेदार खेल की सीमाएं जांचें; क्रिकेट ज्ञान और आर्थिक जोखिम दो अलग चीजें हैं। यही छोटा फर्क कई लोगों को अनावश्यक परेशानी से बचाता है।

आज का अगला कदम सरल है: एक टी20 मैच चुनें और हर ओवर में वैध गेंद, एक्स्ट्रा तथा विकेट अलग-अलग नोट करें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: क्रिकेट में एक ओवर में कितनी गेंदें होती हैं?

उत्तर: एक ओवर में छह वैध गेंदें होती हैं। वाइड और नो-बॉल ओवर की वैध गेंदों में नहीं गिनी जातीं, इसलिए छह वैध गेंदें पूरी करने के लिए गेंदबाज को छह से अधिक वास्तविक डिलीवरी करनी पड़ सकती हैं। उदाहरण के लिए, यदि ओवर में दो वाइड हुईं, तो कुल आठ गेंदें फेंकी जा सकती हैं। स्कोरकार्ड में 4.2 ओवर का अर्थ चार ओवर और दो वैध गेंदें होता है, 4.2 दशमलव ओवर नहीं।

प्रश्न: नो-बॉल और वाइड में क्या अंतर है?

उत्तर: नो-बॉल गेंदबाज की अवैध डिलीवरी है, जबकि वाइड बल्लेबाज की पहुंच से बहुत बाहर गई गेंद है। दोनों पर टीम को सामान्यतः एक अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद दोबारा फेंकी जाती है। नो-बॉल पर सीमित ओवर क्रिकेट में फ्री हिट मिल सकती है, लेकिन यह सुविधा प्रतियोगिता की लागू खेल-शर्तों पर निर्भर करती है। अतिरिक्त रन बल्लेबाज के निजी स्कोर के बजाय टीम के एक्स्ट्रा में दर्ज होते हैं।

प्रश्न: एलबीडब्ल्यू आउट कैसे दिया जाता है?

उत्तर: एलबीडब्ल्यू के लिए अंपायर को देखना होता है कि गेंद बल्लेबाज के शरीर से टकराने से पहले बल्ले पर नहीं लगी और अनुमानित रूप से विकेट पर लगती। गेंद कहां पिच हुई, पैड पर कहां लगी और बल्लेबाज ने शॉट खेलने का प्रयास किया या नहीं, ये सभी बातें महत्वपूर्ण हैं। ऑफ-स्टंप के बाहर पिच हुई गेंद पर सामान्यतः एलबीडब्ल्यू नहीं दिया जाता, हालांकि नियमों में विशेष परिस्थितियां मौजूद हैं। डीआरएस में हॉक-आई अनुमानित गेंद-पथ दिखाता है।

प्रश्न: क्रिकेट का स्कोरकार्ड शुरुआती व्यक्ति कैसे पढ़े?

उत्तर: पहले टीम का कुल स्कोर, विकेट और ओवर पढ़ें, जैसे 180/6 का अर्थ 180 रन और छह विकेट है। फिर बल्लेबाजों के रन, गेंदों की संख्या, चौके-छक्के और गेंदबाजों के ओवर देखें। 20 ओवर के मैच में 20.0 ओवर पूरी पारी दर्शाता है, जबकि 19.5 का अर्थ 19 ओवर और पांच वैध गेंदें है। एक्स्ट्रा को बल्लेबाज के व्यक्तिगत स्कोर से अलग रखें, क्योंकि वाइड और नो-बॉल टीम के कुल रन बढ़ाते हैं।

प्रश्न: टी20 और एकदिवसीय क्रिकेट में क्या अंतर है?

उत्तर: टी20 में प्रत्येक टीम को सामान्यतः 20 ओवर मिलते हैं, जबकि एकदिवसीय क्रिकेट में प्रत्येक टीम को अधिकतम 50 ओवर मिलते हैं। टी20 तेज रणनीति, पावर हिटिंग और सीमित गेंदबाजी विकल्पों पर आधारित होता है; एकदिवसीय मैच में पारी निर्माण और गेंदबाजी स्पेल का महत्व अधिक होता है। पावरप्ले, क्षेत्ररक्षण प्रतिबंध और समीक्षा संख्या प्रतियोगिता के नियमों से बदल सकती है। टेस्ट क्रिकेट अलग है, क्योंकि उसमें पांच दिन और प्रति टीम दो पारियां हो सकती हैं।

प्रश्न: डीआरएस काम न करे या तकनीक उपलब्ध न हो तो क्या होता है?

उत्तर: डीआरएस उपलब्ध न होने पर मैदानी अंपायर का निर्णय अंतिम रहता है, जब तक प्रतियोगिता की विशेष व्यवस्था कुछ और न कहे। तकनीकी खराबी, प्रसारण समस्या या अपर्याप्त कैमरा-एंगल में तीसरा अंपायर उपलब्ध प्रमाण के आधार पर निर्णय करता है। समीक्षा की समय-सीमा और संख्या आईसीसी या संबंधित बोर्ड की खेल-शर्तों में लिखी होती है। इसलिए 2026 के किसी मैच में लागू नियम वही मानें जो उस प्रतियोगिता की आधिकारिक पुस्तिका में दर्ज हैं।

क्रिकेट के नियमों का सार यही है: वैध गेंद पहचानें, क्रीज और विकेट पर ध्यान दें, एक्स्ट्रा को अलग रखें और प्रारूप की विशेष शर्तें जांचें। अब किसी लाइव मैच का स्कोरकार्ड खोलिए और सीखी हुई बातों को लागू कीजिए।

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पढ़ने के लिए धन्यवाद।

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खेल का मैदान · Strategic Archive

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