नो-बॉल समझने से पहले पढ़ें ये नियम
क्रिकेट में नो-बॉल वह अमान्य डिलीवरी है जिसमें गेंदबाज नियम तोड़ता है और बल्लेबाजी टीम को कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है। एमसीसी के क्रिकेट नियमों के अनुसार फ्रंट-फुट लाइन पार करना, कमर से ऊपर फुल टॉ...
नो-बॉल समझने से पहले पढ़ें ये नियम
क्रिकेट में नो-बॉल वह अमान्य डिलीवरी है जिसमें गेंदबाज नियम तोड़ता है और बल्लेबाजी टीम को कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है। एमसीसी के क्रिकेट नियमों के अनुसार फ्रंट-फुट लाइन पार करना, कमर से ऊपर फुल टॉस फेंकना और खतरनाक बाउंसर इसके प्रमुख कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद और एमसीसी के नियमों में प्रारूप के अनुसार कुछ अंतर दिख सकते हैं; टी20 और एकदिवसीय क्रिकेट में नो-बॉल के बाद अगली गेंद अक्सर फ्री हिट होती है। नो-बॉल पर सामान्यतः ओवर की छह वैध गेंदों में कोई गेंद नहीं जुड़ती, इसलिए गेंदबाज को अतिरिक्त डिलीवरी करनी पड़ती है। बल्लेबाज रन-आउट को छोड़कर अधिकांश तरीकों से आउट नहीं हो सकता। खेल का मैदान पर नियम समझने की कुंजी है: पहले नो-बॉल का कारण पहचानें, फिर अतिरिक्त रन, फ्री हिट और आउट की स्थिति जाँचें।
क्रिकेट में एक छोटी-सी गलती पूरे ओवर का संतुलन बिगाड़ सकती है। तेज गेंदबाज का पैर क्रीज से आगे निकलना, स्पिनर का गलत दिशा से डिलीवरी करना या ऊंची फुल टॉस फेंकना केवल तकनीकी भूल नहीं है; इससे बल्लेबाजी टीम को रन और कभी-कभी फ्री हिट भी मिलती है। एमसीसी लॉ 21 नो-बॉल से जुड़ी मूल व्यवस्था बताता है, जबकि आईसीसी प्रतियोगिता नियम प्रारूप के हिसाब से अतिरिक्त प्रावधान जोड़ सकते हैं। इसलिए मैदान पर सुनी गई हर “नो-बॉल” को एक ही कारण से जोड़ना ठीक नहीं होगा, जनाब—क्रिकेट इतना सरल होता तो अंपायरों की इतनी जरूरत ही क्या थी।

खेल का मैदान पर क्रिकेट नियमों, मैच समीक्षा और खिलाड़ी आंकड़ों को समझने के लिए संबंधित क्रिकेट नियमों की शुरुआती मार्गदर्शिका भी देखी जा सकती है।
नो-बॉल के मूल नियम समझने के बाद मैच में अंपायर का संकेत, स्कोरबोर्ड पर अतिरिक्त रन और अगली डिलीवरी का दर्जा साथ-साथ देखना सबसे सुरक्षित तरीका है।
क्या नो-बॉल केवल गेंदबाज का पैर आगे निकलने पर होती है?
नो-बॉल केवल फ्रंट-फुट की गलती से नहीं होती; कमर से ऊपर फुल टॉस, खतरनाक बाउंसर, गलत गेंदबाजी क्रिया और क्षेत्ररक्षण प्रतिबंधों का उल्लंघन भी इसके कारण बन सकते हैं। एमसीसी लॉ 21 और प्रतियोगिता की खेल-शर्तें तय करती हैं कि किस घटना पर नो-बॉल घोषित होगी तथा बल्लेबाज को कौन-सी सुरक्षा मिलेगी।
फ्रंट-फुट नो-बॉल सबसे आम स्थिति है। गेंदबाज का आगे वाला पैर पॉपिंग क्रीज के पीछे या उसकी सीमा के भीतर होना चाहिए; रेखा को छूना भी कई परिस्थितियों में उल्लंघन माना जाता है। पीछे वाले पैर को रिटर्न क्रीज के बाहर नहीं जाना चाहिए, वरना अंपायर नो-बॉल दे सकता है। तेज गेंदबाजों में लंबा रन-अप और अंतिम स्ट्राइड इस गलती का जोखिम बढ़ाते हैं, जबकि स्पिन गेंदबाजों में गलत छलांग या संतुलन समस्या अधिक दिखाई दे सकती है।
नो-बॉल के प्रमुख कारणों को इस तरह याद रखें:
- फ्रंट-फुट का पॉपिंग क्रीज से आगे निकलना।
- कमर से ऊपर बिना उछले फुल टॉस आना।
- तय सीमा से अधिक या खतरनाक बाउंसर फेंकना।
- गेंदबाज का गेंदबाजी क्रिया में अनुचित बदलाव करना।
- क्षेत्ररक्षण में नियमों के अनुसार निर्धारित खिलाड़ियों की स्थिति गलत होना।
- गेंद को बल्लेबाज तक पहुंचने से पहले जानबूझकर रोकना या अनुचित ढंग से फेंकना।
एमसीसी के अनुसार नो-बॉल का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि बल्लेबाज की सुरक्षा और निष्पक्ष मुकाबला बनाए रखना है। एमसीसी के आधिकारिक क्रिकेट नियम में नो-बॉल की विस्तृत शर्तें दी गई हैं। एक उपयोगी व्यावहारिक बात यह है कि टीवी रीप्ले में पैर की स्थिति दिखने पर भी अंतिम निर्णय मैदानी अंपायर या तीसरे अंपायर की प्रक्रिया पर निर्भर करता है; कैमरा हर कोण से न्यायाधीश नहीं बन जाता, भले दर्शक ऐसा मानते हों।
अधिक स्पष्टता के लिए फ्रंट-फुट और पॉपिंग क्रीज नियम पढ़ना उपयोगी रहेगा।
नो-बॉल की वजह पहचानते समय केवल गेंद की ऊंचाई नहीं, बल्कि पिचिंग स्थान, बल्लेबाज की स्थिति और गेंदबाज के पैर का संपर्क भी देखना चाहिए। यही वह बारीकी है जिसे सामान्य सारांश अक्सर छोड़ देते हैं।
कमर से ऊपर फुल टॉस होने पर नियम कैसे लागू होता है?
कमर से ऊपर की बिना उछली फुल टॉस, जिसे बीमर कहा जाता है, सामान्यतः नो-बॉल होती है क्योंकि यह बल्लेबाज के लिए खतरनाक हो सकती है। निर्णय बल्लेबाज के क्रीज पर खड़े होने की ऊंचाई और गेंद के बिना उछले पहुंचने पर आधारित होता है; उछलकर आने वाली गेंद का नियम अलग हो सकता है।
कमर की ऊंचाई का निर्णय गेंद के बल्लेबाज तक पहुंचने के क्षण से जुड़ा होता है, न कि गेंदबाज के हाथ से निकलते समय उसकी ऊंचाई से। यही कारण है कि बहुत तेज गेंद, धीमी गेंद और यॉर्कर की असफल कोशिशों में अंपायर का निर्णय अलग दिख सकता है। यदि गेंद कमर से ऊपर फुल टॉस होकर आती है तो नो-बॉल के साथ अतिरिक्त रन मिलता है और सीमित ओवरों के कई मुकाबलों में अगली गेंद फ्री हिट होती है।
बीमर के मामले में ये बातें विशेष रूप से ध्यान देने योग्य हैं:
- पहली खतरनाक फुल टॉस पर अंपायर चेतावनी दे सकता है।
- दोबारा खतरनाक डिलीवरी होने पर गेंदबाज को आक्रमण से हटाया जा सकता है।
- बल्लेबाज को चोट का वास्तविक जोखिम हो तो अंपायर सुरक्षा नियमों को प्राथमिकता देता है।
- प्रतियोगिता की खेल-शर्तें बीमर और बाउंसर की सीमा को और कड़ा कर सकती हैं।
एमसीसी के नियमों में खतरनाक और अनुचित गेंदबाजी पर अंपायरों को कार्रवाई का अधिकार दिया गया है। “खतरनाक गेंदबाजी की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए”—इस सिद्धांत का अर्थ यही है कि केवल रन रोकना पर्याप्त नहीं, खिलाड़ी की सुरक्षा भी खेल का हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की आधिकारिक खेल-शर्तें प्रारूप के अनुसार सीमा और दंड स्पष्ट करती हैं।
इस हिस्से में एक कम चर्चित बिंदु यह है कि हर ऊंची गेंद बीमर नहीं होती। यदि गेंद पहले पिच पर टप्पा खाकर बल्लेबाज के कंधे या सिर के पास जाती है तो वह बाउंसर के नियमों में आ सकती है; बाउंसर की वैधता गेंद की ऊंचाई, पहले से फेंकी गई बाउंसरों की संख्या और मैच प्रारूप पर निर्भर करती है। इसलिए “ऊंची गेंद दिखी, नो-बॉल होगी” वाला शॉर्टकट थोड़ा आलसी निष्कर्ष है।
नो-बॉल, बीमर और बाउंसर का अंतर समझना हो तो बाउंसर और खतरनाक गेंदबाजी के नियम देखिए।
यह जानकारी लाइव मैच में निर्णय को समझने में मदद करती है, लेकिन स्थानीय लीग में लागू खेल-शर्तें जरूर पढ़ें; स्कूल, क्लब और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के नियम हूबहू समान नहीं होते।
अब नो-बॉल की पहचान के बाद स्कोर पर उसका असर समझना ज्यादा आसान हो जाता है।
फ्री हिट और आउट होने की सीमा में क्या फर्क है?
नो-बॉल के बाद फ्री हिट का प्रावधान मुख्यतः एकदिवसीय और टी20 क्रिकेट में लागू होता है, जबकि टेस्ट क्रिकेट में सामान्यतः अगली गेंद फ्री हिट नहीं होती। नो-बॉल वाली डिलीवरी पर बल्लेबाज रन-आउट, हिट-द-विकेट जैसे कुछ विशेष मामलों को छोड़कर सामान्य तरीकों से आउट नहीं हो सकता।
नो-बॉल पर बल्लेबाज को मिलने वाली सुरक्षा को अक्सर गलत समझा जाता है। यदि बल्लेबाज गेंद को खेलता है और कैच हो जाता है, तो कैच से आउट नहीं दिया जा सकता; लेकिन गेंद लाइव रहती है और बल्लेबाज दौड़कर रन बना सकता है। रन-आउट संभव है, चाहे बल्लेबाज क्रीज से बाहर निकला हो और गेंद क्षेत्ररक्षक के हाथों से होकर विकेट गिराए। कुछ नियमों में गेंद को दो बार मारना या गेंद को जानबूझकर रोकना भी अलग तरीके से देखा जाता है, इसलिए हर अपील को “नो-बॉल है, आउट नहीं होगा” कहकर खारिज करना गलत है।
नो-बॉल पर रन और अगली गेंद का सामान्य ढांचा इस प्रकार है:
- कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन बल्लेबाजी टीम के खाते में जुड़ता है।
- बल्ले से बने रन या दौड़कर लिए गए रन अतिरिक्त रन के ऊपर जुड़ सकते हैं।
- गेंद ओवर की छह वैध गेंदों में नहीं गिनी जाती।
- सीमित ओवरों के क्रिकेट में अगली वैध डिलीवरी फ्री हिट हो सकती है।
- फ्री हिट पर बल्लेबाज को केवल उन्हीं तरीकों से आउट किया जा सकता है जो उस डिलीवरी पर नियमों के अनुसार लागू हों।
फ्री हिट का मतलब यह नहीं कि बल्लेबाज अजेय हो गया। वह रन-आउट हो सकता है, गेंद को विकेट पर मारकर हिट-द-विकेट की स्थिति बन सकती है या नियमों में शामिल अन्य अपवाद लागू हो सकते हैं। खास बात यह है कि फ्री हिट का संकेत अगली गेंद के लिए होता है; यदि अगली डिलीवरी भी नो-बॉल निकलती है तो फ्री हिट आगे जारी रहती है। यही वह परिचालन बिंदु है जिसे कई दर्शक और कभी-कभी नए स्कोरर भी भूल जाते हैं।
टी20 मुकाबलों में नो-बॉल का प्रभाव अधिक बड़ा हो सकता है, क्योंकि एक अतिरिक्त रन के साथ जोखिम-मुक्त आक्रामक शॉट का अवसर मिलता है। खेल का मैदान की टी20 बल्लेबाजी रणनीति में ऐसे अवसरों पर फील्ड और शॉट चयन का विस्तृत संदर्भ मिल सकता है।
नो-बॉल का असली मूल्य केवल एक रन नहीं, बल्कि अतिरिक्त डिलीवरी, फ्री हिट और बल्लेबाज के मनोवैज्ञानिक लाभ का संयुक्त असर है। इसलिए अंतिम ओवर में एक गलती स्कोरकार्ड पर छोटी दिख सकती है, मगर मैच की दिशा बदल सकती है—क्रिकेट का हिसाब कभी-कभी काफी शरारती होता है।
नो-बॉल के नियम कहां भ्रम पैदा करते हैं?
नो-बॉल के नियम तब भ्रमित करते हैं जब दर्शक एमसीसी के मूल कानून, आईसीसी की प्रतियोगिता शर्तों और स्थानीय क्रिकेट के संशोधित नियमों को एक ही व्यवस्था मान लेते हैं। बाउंसर की संख्या, फ्री हिट, बीमर पर कार्रवाई और क्षेत्ररक्षण प्रतिबंध प्रारूप तथा टूर्नामेंट के अनुसार बदल सकते हैं।
सबसे आम भ्रम यह है कि हर नो-बॉल पर फ्री हिट मिलती है। सीमित ओवरों के अंतरराष्ट्रीय और अधिकांश पेशेवर टी20 मुकाबलों में यह सामान्य व्यवस्था है, लेकिन टेस्ट मैच या स्थानीय टूर्नामेंट में खेल-शर्तें अलग हो सकती हैं। दूसरा भ्रम अतिरिक्त रन को लेकर है: नो-बॉल का दंड सामान्यतः 1 रन है, पर गेंद सीमा पार कर जाए, बल्लेबाज दौड़ ले या गेंद वाइड भी हो जाए तो कुल रन अलग तरीके से दर्ज हो सकते हैं।
स्कोरर और दर्शक इन संकेतों पर ध्यान दें:
- अंपायर का एक हाथ बगल की ओर फैलना नो-बॉल का संकेत है।
- स्कोरबोर्ड पर “एनबी” या अतिरिक्त रन का कॉलम नो-बॉल दिखा सकता है।
- फ्री हिट का चिह्न अगली गेंद से पहले प्रदर्शित हो सकता है।
- गेंदों की गिनती केवल वैध डिलीवरी के आधार पर बढ़ती है।
- बल्लेबाज के बल्ले से बने रन और नो-बॉल अतिरिक्त रन अलग श्रेणियों में दर्ज होते हैं।
एक और कम चर्चित तकनीकी मामला गेंदबाज के पीछे वाले पैर का रिटर्न क्रीज से बाहर जाना है। दर्शक अक्सर केवल आगे वाला पैर देखते हैं, जबकि पीछे वाले पैर की स्थिति भी नो-बॉल का कारण बन सकती है। इसी तरह क्षेत्ररक्षण प्रतिबंधों का उल्लंघन—विशेषकर पावरप्ले में—बल्लेबाज को बिना शॉट खेले भी लाभ दे सकता है। यह जानकारी लाइव प्रसारण में कम समझाई जाती है, मगर स्कोरर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

यदि स्कोरिंग की बारीकियां समझनी हों तो क्रिकेट स्कोरकार्ड पढ़ने की पूरी विधि उपयोगी संदर्भ है।
निर्णय पर विवाद होने पर अंपायर समीक्षा प्रणाली भी भूमिका निभा सकती है। कई प्रतियोगिताओं में फ्रंट-फुट नो-बॉल की जांच तीसरा अंपायर करता है, लेकिन हर स्थानीय मैच में ऐसी तकनीक उपलब्ध नहीं होती। इसलिए खेल शुरू होने से पहले प्रतियोगिता के नियम पढ़ना सबसे सस्ता और सबसे समझदार उपाय है।
क्या आज नो-बॉल के नियम समझना जरूरी है?
हां, नो-बॉल के नियम समझना जरूरी है क्योंकि एक अतिरिक्त रन, अतिरिक्त गेंद और फ्री हिट मिलकर मैच की रणनीति बदल सकते हैं। बल्लेबाज, गेंदबाज, कप्तान, स्कोरर और दर्शक—सभी के लिए सबसे उपयोगी तरीका है कि एमसीसी कानून के साथ संबंधित प्रतियोगिता की खेल-शर्तों को भी पढ़ें।
गेंदबाजों के लिए केवल पैर रोकना पर्याप्त नहीं है। रन-अप की लंबाई, अंतिम दो कदम, रिलीज बिंदु और बाउंसर की योजना को प्रशिक्षण में दोहराना चाहिए। कप्तान को फील्ड सेट करते समय नो-बॉल के बाद संभावित फ्री हिट को ध्यान में रखना चाहिए, क्योंकि एक ही गेंद पर आक्रामक बल्लेबाज का जोखिम अचानक कम हो जाता है। बल्लेबाज को फ्री हिट पर केवल जोरदार शॉट सोचने के बजाय फील्ड, गेंद की लंबाई और विकेट बचाने की प्राथमिकता भी देखनी चाहिए।
मैच से पहले यह छोटी जांच-सूची काम आती है:
- क्या प्रतियोगिता में नो-बॉल के बाद फ्री हिट लागू है?
- बीमर और बाउंसर की निर्धारित सीमा क्या है?
- फ्रंट-फुट की निगरानी कौन करेगा?
- तीसरे अंपायर की समीक्षा किन घटनाओं पर होगी?
- नो-बॉल के अतिरिक्त रन स्कोरकार्ड में कैसे दर्ज होंगे?
- स्थानीय नियम एमसीसी या आईसीसी व्यवस्था से कहां अलग हैं?
“नियम जानना रणनीति का हिस्सा है”—यह बात केवल किताबों के लिए नहीं है। खेल का मैदान पर मैच समीक्षा पढ़ते समय नो-बॉल की संख्या, गेंदबाज का स्पेल, पावरप्ले और अंतिम ओवर के संदर्भ को साथ देखें। केवल कुल नो-बॉल गिनने से पूरी कहानी नहीं मिलती; यह भी देखें कि वे कब हुईं, किस बल्लेबाज के सामने हुईं और क्या फ्री हिट पर चौका या छक्का लगा।

आज से किसी भी मैच में नो-बॉल देखने के लिए तीन चरण अपनाएं: कारण पहचानें, अतिरिक्त रन जांचें और अगली गेंद का दर्जा देखें। इससे बहस कम होगी और खेल की समझ बढ़ेगी—हालांकि दोस्तों के साथ अंपायर बनने की आदत शायद फिर भी नहीं जाएगी।
क्रिकेट के नियमों और रोजाना मैच विश्लेषण के लिए खेल का मैदान की ताजा सामग्री पढ़ें।
यह विषय समझ में आ गया हो तो नियमों को वास्तविक स्कोरकार्ड पर लागू करके देखना सबसे अच्छा अगला कदम है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: क्रिकेट में नो-बॉल क्या होती है?
उत्तर: नो-बॉल वह अमान्य डिलीवरी है जिसमें गेंदबाज क्रिकेट के निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता है और बल्लेबाजी टीम को सामान्यतः कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है। फ्रंट-फुट का क्रीज से आगे जाना, कमर से ऊपर बिना उछली फुल टॉस और खतरनाक बाउंसर इसके सामान्य कारण हैं। नो-बॉल ओवर की छह वैध गेंदों में नहीं गिनी जाती, इसलिए गेंदबाज को अतिरिक्त डिलीवरी करनी पड़ती है। सीमित ओवरों के कई प्रारूपों में इसके बाद फ्री हिट भी मिलती है।
प्रश्न: नो-बॉल के बाद फ्री हिट कब मिलती है?
उत्तर: फ्री हिट सामान्यतः एकदिवसीय और टी20 क्रिकेट में नो-बॉल के तुरंत बाद वाली गेंद पर मिलती है। टेस्ट क्रिकेट में आम तौर पर यह व्यवस्था लागू नहीं होती, जब तक प्रतियोगिता की विशेष खेल-शर्तें कुछ और न कहें। यदि फ्री हिट वाली गेंद भी नो-बॉल हो जाए, तो अगली गेंद फिर फ्री हिट रहती है। प्रसारण में फ्री हिट का संकेत दिख सकता है, लेकिन अंतिम पुष्टि अंपायर और आधिकारिक स्कोरर के निर्णय से होती है।
प्रश्न: नो-बॉल और वाइड में क्या अंतर है?
उत्तर: नो-बॉल गेंदबाज की डिलीवरी या गेंदबाजी स्थिति से जुड़ी अमान्यता है, जबकि वाइड बल्लेबाज की सामान्य पहुंच से बहुत दूर गेंद जाने पर दी जाती है। दोनों में सामान्यतः 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद वैध डिलीवरी में नहीं गिनी जाती। नो-बॉल के बाद सीमित ओवरों में फ्री हिट मिल सकती है, जबकि वाइड के बाद सामान्यतः फ्री हिट नहीं मिलती। दोनों के संकेत, स्कोरिंग श्रेणी और रणनीतिक प्रभाव अलग होते हैं।
प्रश्न: नो-बॉल पर बल्लेबाज किन तरीकों से आउट हो सकता है?
उत्तर: नो-बॉल पर बल्लेबाज रन-आउट और कुछ विशेष अपवादों को छोड़कर सामान्यतः आउट नहीं हो सकता। कैच, बोल्ड और एलबीडब्ल्यू जैसे सामान्य आउट इस डिलीवरी पर मान्य नहीं होते, हालांकि गेंद लाइव रहती है और दौड़कर रन बनाए जा सकते हैं। रन-आउट तब संभव है जब बल्लेबाज क्रीज से बाहर हो और क्षेत्ररक्षक विकेट गिरा दे। हिट-द-विकेट तथा गेंद को दो बार मारने जैसे मामलों में संबंधित नियम अलग से लागू होते हैं।
प्रश्न: क्या हर ऊंची गेंद नो-बॉल होती है?
उत्तर: हर ऊंची गेंद नो-बॉल नहीं होती; कमर से ऊपर बिना उछली फुल टॉस आम तौर पर नो-बॉल होती है, जबकि टप्पा खाने के बाद ऊंची गेंद बाउंसर के नियम में आ सकती है। बाउंसर की वैधता गेंद की ऊंचाई, पारी में पहले फेंकी गई बाउंसरों की संख्या और मैच प्रारूप पर निर्भर करती है। खतरनाक बीमर पर अंपायर चेतावनी दे सकता है और दोहराव होने पर गेंदबाज को आक्रमण से हटाया जा सकता है।
प्रश्न: नो-बॉल के नियम जानने के लिए कौन-से स्रोत भरोसेमंद हैं?
उत्तर: एमसीसी के आधिकारिक क्रिकेट नियम और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की प्रतियोगिता खेल-शर्तें सबसे भरोसेमंद प्राथमिक स्रोत हैं। स्थानीय टूर्नामेंट में आयोजक द्वारा जारी नियम-पत्र भी पढ़ना चाहिए, क्योंकि फ्री हिट, बाउंसर सीमा और समीक्षा प्रणाली अलग हो सकती है। मैच के दौरान आधिकारिक स्कोरकार्ड, अंपायर संकेत और प्रसारण ग्राफिक्स को मिलाकर देखना उपयोगी है। खेल का मैदान जैसे क्रिकेट-केंद्रित मंच नियमों की व्याख्या दे सकते हैं, लेकिन अंतिम अधिकार प्रतियोगिता के आधिकारिक नियमों का ही होता है।
प्रश्न: नो-बॉल का अतिरिक्त रन स्कोरकार्ड में कैसे दर्ज होता है?
उत्तर: नो-बॉल का दंड सामान्यतः अतिरिक्त रन के रूप में दर्ज होता है और बल्लेबाज के व्यक्तिगत स्कोर में नहीं जुड़ता। यदि बल्लेबाज बल्ले से रन बनाता है, गेंद सीमा पार करती है या खिलाड़ी दौड़कर अतिरिक्त रन लेते हैं, तो कुल स्कोर 1 रन से अधिक हो सकता है। गेंद फिर भी वैध डिलीवरी नहीं मानी जाती और ओवर की गिनती नहीं बढ़ती। स्कोरकार्ड में नो-बॉल अक्सर अतिरिक्त रन की अलग श्रेणी में दिखाई जाती है, इसलिए बल्लेबाज और टीम के कुल रन अलग-अलग पढ़ें।
नियम स्पष्ट हों तो मैच पढ़ना आसान हो जाता है—और अगली बार कोई दोस्त बिना वजह “फ्री हिट” चिल्लाए, तो उसके पास नियम सहित जवाब तैयार रहेगा।
पढ़ने के लिए धन्यवाद।
खेल का मैदान · Strategic Archive